श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 438
 
 
श्लोक  3.4.438 
ঽকৃষ্ণঽ নাম শুনিলেই করেন হুঙ্কার
ক্ষণেকে সহস্র হয কৃষ্ণের বিকার
ऽकृष्णऽ नाम शुनिलेइ करेन हुङ्कार
क्षणेके सहस्र हय कृष्णेर विकार
 
 
अनुवाद
कृष्ण का नाम सुनते ही वह ज़ोर से दहाड़ने लगता। एक ही क्षण में उसके शरीर में कृष्ण-प्रेम के हज़ारों रूप प्रकट हो जाते।
 
Upon hearing Krishna's name, he would roar loudly. In an instant, thousands of manifestations of Krishna's love would manifest within his body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)