श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 406
 
 
श्लोक  3.4.406 
পথে চলিঽ যাইতে ও আপনাঽ-আপনি
নাচেন পরম-রঙ্গে করিঽ হরি-ধ্বনি
पथे चलिऽ याइते ओ आपनाऽ-आपनि
नाचेन परम-रङ्गे करिऽ हरि-ध्वनि
 
 
अनुवाद
यहां तक ​​कि सड़क पर चलते समय भी वह आनंद में नाचते रहते और हरि का नाम जपते रहते।
 
Even while walking on the road he would dance in joy and chant the name of Hari.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)