श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 396
 
 
श्लोक  3.4.396 
হেন-মতে শ্রী-গৌরসুন্দর শান্তিপুরে
আছেন পরমানন্দে অদ্বৈত-মন্দিরে
हेन-मते श्री-गौरसुन्दर शान्तिपुरे
आछेन परमानन्दे अद्वैत-मन्दिरे
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्री गौरसुन्दर ने शांतिपुर में अद्वैत के घर में निवास करते हुए दिव्य सुख का आनंद लिया।
 
Thus Sri Gaurasundara enjoyed transcendental happiness while residing in the house of Advaita in Shantipur.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)