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श्लोक 3.4.395  |
যে গায, যে শুনে, এ সকল পুণ্য-কথা
বৈষ্ণবাপরাধ তার না জন্মে সর্বথা |
ये गाय, ये शुने, ए सकल पुण्य-कथा
वैष्णवापराध तार ना जन्मे सर्वथा |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य इन शुभ विषयों का कीर्तन करता है या सुनता है, वह कभी भी वैष्णवों का अपराध नहीं करता। |
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| A person who chants or listens to these auspicious topics never commits any offense against the Vaishnavas. |
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