श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.4.39 
দুই লোচনের জল অদ্ভুত দেখিতে
কত নদী বহে হেন না পারি কহিতে
दुइ लोचनेर जल अद्भुत देखिते
कत नदी वहे हेन ना पारि कहिते
 
 
अनुवाद
"उनकी आँखों से बहते आँसू देखना अद्भुत है। मैं वर्णन नहीं कर सकता कि उनकी आँखों से कितनी धाराएँ बह रही हैं।"
 
"It's amazing to see the tears flowing from their eyes. I can't describe how many streams are flowing from their eyes."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)