श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 383
 
 
श्लोक  3.4.383 
শুনিযা প্রভুর অতি সুসত্য বচন
মহা-জয-জয-ধ্বনি কৈলা ভক্ত-গণ
शुनिया प्रभुर अति सुसत्य वचन
महा-जय-जय-ध्वनि कैला भक्त-गण
 
 
अनुवाद
भगवान के अत्यन्त सत्य वचन सुनकर सभी भक्तगण “जय! जय!” का जाप करने लगे।
 
Hearing the very true words of the Lord, all the devotees started chanting "Jai! Jai!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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