श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 382
 
 
श्लोक  3.4.382 
মহা-শুদ্ধ-বুদ্ধি তিঙ্হো তাঙ্র ঠাঞি গেলে
ক্ষমিবেন সব তোরে, নিস্তারিব হেলে”
महा-शुद्ध-बुद्धि तिङ्हो ताङ्र ठाञि गेले
क्षमिबेन सब तोरे, निस्तारिब हेले”
 
 
अनुवाद
"उसकी बुद्धि अत्यंत पवित्र है। यदि तुम उसके पास जाओ, तो वह तुम्हारा अपराध सहज ही क्षमा कर देगा और तुम्हें मुक्ति दिला देगा।"
 
"His wisdom is extremely pure. If you approach him, he will readily forgive your sins and grant you salvation."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)