श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 375
 
 
श्लोक  3.4.375 
প্রভু বলে,—“বৈষ্ণব নিন্দযে যেই জন
কুষ্ঠ-রোগ কোন্ তার শাস্তিযে লিখন
प्रभु बले,—“वैष्णव निन्दये येइ जन
कुष्ठ-रोग कोन् तार शास्तिये लिखन
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "वैष्णव की निन्दा करने वाले व्यक्ति के लिए अन्य दण्डों की तुलना में कुष्ठ रोग नगण्य है।
 
The Lord said, “Leprosy is insignificant compared to other punishments for one who slanders a Vaishnava.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)