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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन
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श्लोक 371
श्लोक
3.4.371
সাধুর স্বভাব-ধর্ম—দুঃখীরে উদ্ধারে
কৃত-অপরাধীরে ও সাধু কৃপা করে
साधुर स्वभाव-धर्म—दुःखीरे उद्धारे
कृत-अपराधीरे ओ साधु कृपा करे
अनुवाद
"दुखियों का उद्धार करना संत पुरुष का स्वाभाविक कर्तव्य है। संत पुरुष अपराधियों पर भी दया करते हैं।"
"It is the natural duty of a saint to save the suffering. Saints even show mercy to criminals."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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