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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन
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श्लोक 349
श्लोक
3.4.349
পর-দুঃখ দেখিঽ তুমি স্বভাবে কাতর
এথেকে আইলুঙ্ মুঞি তোমার গোচর
पर-दुःख देखिऽ तुमि स्वभावे कातर
एथेके आइलुङ् मुञि तोमार गोचर
अनुवाद
"आप स्वभाव से ही दूसरों का दुःख देखकर दुःखी होते हैं। इसलिए मैं आपके समक्ष आया हूँ।"
"You are naturally saddened by the suffering of others. That is why I have come before you."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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