श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 315
 
 
श्लोक  3.4.315 
বসিযা আছেন প্রভু শ্রী-গৌরসুন্দর
চতুর্-দিকে বসিলেন সর্ব অনুচর
वसिया आछेन प्रभु श्री-गौरसुन्दर
चतुर्-दिके वसिलेन सर्व अनुचर
 
 
अनुवाद
भगवान गौरसुन्दर के सभी सेवक आये और उनके चारों ओर बैठ गये।
 
All the servants of Lord Gaurasundara came and sat around him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)