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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन
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श्लोक 298
श्लोक
3.4.298
ঽসালিঞ্চাঽ ঽহেলেঞ্চাঽ শাক ভক্ষণ করিলে
আরোগ্য থাকযে তারে কৃষ্ণ-ভক্তি মিলে”
ऽसालिञ्चाऽ ऽहेलेञ्चाऽ शाक भक्षण करिले
आरोग्य थाकये तारे कृष्ण-भक्ति मिले”
अनुवाद
“सालिन्चा और हेलंचाका खाने से मनुष्य रोग मुक्त रहता है और कृष्ण की भक्ति प्राप्त करता है।”
“By eating Salincha and Helanchaka, a person remains free from diseases and attains devotion to Krishna.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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