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श्लोक 3.4.275  |
এ সব আনন্দ পডে, শুনে যেই জন
অবশ্য মিলযে তারে কৃষ্ণ-প্রেম-ধন |
ए सब आनन्द पडे, शुने येइ जन
अवश्य मिलये तारे कृष्ण-प्रेम-धन |
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| अनुवाद |
| जो कोई भी इन आनंदमय लीलाओं को पढ़ता या सुनता है, उसे निश्चित रूप से कृष्ण के प्रति आनंदमय प्रेम की संपत्ति प्राप्त होगी। |
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| Whoever reads or listens to these blissful pastimes will certainly acquire the wealth of blissful love for Krishna. |
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