श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 273-274
 
 
श्लोक  3.4.273-274 
হরিদাস, মুরারি, শ্রীগর্ভ, নারাযণ
জগদীশ-গোপীনাথ-আদি ভক্ত-গণ
আইর সন্তোষে সবে হেন সে হৈলা
পরানন্দে যেহেন সবেই মিশাইলা
हरिदास, मुरारि, श्रीगर्भ, नारायण
जगदीश-गोपीनाथ-आदि भक्त-गण
आइर सन्तोषे सबे हेन से हैला
परानन्दे येहेन सबेइ मिशाइला
 
 
अनुवाद
हरिदास, मुरारी, श्रीगर्भ, नारायण, जगदीश और गोपीनाथ आदि भक्तगण माता शची की संतुष्टि देखकर इतने प्रसन्न हुए कि मानो वे दिव्य आनंद में विलीन हो गए।
 
Devotees like Haridas, Murari, Shrigarbha, Narayan, Jagdish and Gopinath were so happy to see the satisfaction of Mother Shachi that it seemed as if they merged in divine bliss.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)