श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 272
 
 
श्लोक  3.4.272 
দেবকীর স্তুতি পডিঽ আচার্য গোসাঞি
আইরে করেন দণ্ডবত্—অন্ত নাঞি
देवकीर स्तुति पडिऽ आचार्य गोसाञि
आइरे करेन दण्डवत्—अन्त नाञि
 
 
अनुवाद
आचार्य गोसाणी ने माता शची को अनंत प्रणाम करते हुए देवकी की स्तुति की।
 
Acharya Gosani offered his infinite obeisances to Mother Shachi and praised Devaki.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)