श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 262
 
 
श्लोक  3.4.262 
প্রাণ-হীন-জন যেন সিন্ধু-মাঝে ভাসে
স্রোতে যহি লযে, তহি চলযে অবশে
प्राण-हीन-जन येन सिन्धु-माझे भासे
स्रोते यहि लये, तहि चलये अवशे
 
 
अनुवाद
“बद्ध आत्माएं समुद्र की लहरों में असहाय रूप से इधर-उधर फेंकी जा रही मृत देहों के समान हैं।
 
“The bound souls are like dead bodies tossed helplessly about in the waves of the ocean.
तात्पर्य
देखिए श्रीमद्भागवतम् (६.१५.३)
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)