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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन
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श्लोक 258
श्लोक
3.4.258
দণ্ডে দণ্ডে যত স্নেহ করিলে আমারে
তোমার সাদ্-গুণ্য সে তাহার প্রতিকারে”
दण्डे दण्डे यत स्नेह करिले आमारे
तोमार साद्-गुण्य से ताहार प्रतिकारे”
अनुवाद
“इसलिए अपने अच्छे गुणों को उस स्नेह का प्रतिफल मानो जो तुमने हर घड़ी मेरे प्रति प्रदर्शित किया है।”
“So consider your good qualities as a reward for the affection you have shown me every moment.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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