श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 244
 
 
श्लोक  3.4.244 
তুমি সে কেবল মূর্তিমতী বিষ্ণু-ভক্তি
যাহা হৈতে সব হয, তুমি সেই শক্তি
तुमि से केवल मूर्तिमती विष्णु-भक्ति
याहा हैते सब हय, तुमि सेइ शक्ति
 
 
अनुवाद
"आप विष्णु भक्ति के साक्षात स्वरूप हैं। आप ही वह शक्ति हैं जिससे सब कुछ उत्पन्न होता है।
 
“You are the very embodiment of Vishnu Bhakti. You are the power from which everything arises.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)