श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 230
 
 
श्लोक  3.4.230 
অতএব আইর যে ভক্তির বিকার
তাহা বর্ণিবেক সব—হেন শক্তি কার
अतएव आइर ये भक्तिर विकार
ताहा वर्णिबेक सब—हेन शक्ति कार
 
 
अनुवाद
अतः माता शची के आनंदमय प्रेम के परिवर्तनों का वर्णन करने की शक्ति किसमें है?
 
So who has the power to describe the changes in the blissful love of Mother Shachi?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)