श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 221
 
 
श्लोक  3.4.221 
কখন কাহারে কহে সম্মুখে দেখিযা
“চল যাই যমুনায স্নান করিঽ গিযা”
कखन काहारे कहे सम्मुखे देखिया
“चल याइ यमुनाय स्नान करिऽ गिया”
 
 
अनुवाद
कभी-कभी जब वह किसी को पास में देखती तो कहती, “चलो यमुना में स्नान करते हैं।”
 
Sometimes when she saw someone nearby, she would say, “Let's take a bath in the Yamuna.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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