श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 215
 
 
श्लोक  3.4.215 
রাম-কৃষ্ণ কে-মত আছেন মথুরায
পাপী কṁস কে-মত বা করে ব্যাবসায
राम-कृष्ण के-मत आछेन मथुराय
पापी कꣳस के-मत वा करे व्यावसाय
 
 
अनुवाद
"कृष्ण और बलराम मथुरा में कैसे हैं? वह पापी कंस अब क्या कर रहा है?"
 
"How are Krishna and Balarama in Mathura? What is that sinful Kansa doing now?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)