श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 214
 
 
श्लोक  3.4.214 
সম্মুখে যাহারে আই দেখেন, তাহারে
জিজ্ঞাসেন,—“মথুরার কথা কহ মোরে
सम्मुखे याहारे आइ देखेन, ताहारे
जिज्ञासेन,—“मथुरार कथा कह मोरे
 
 
अनुवाद
जो भी उसके सामने आता, उससे पूछती, “मुझे मथुरा के बारे में कुछ बताओ।”
 
Whoever came in front of her, she would ask him, “Tell me something about Mathura.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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