श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.4.21 
সবে মেলিঽ আনন্দে করেন হরি-ধ্বনি
নিরন্তর চতুর্-দিকে আর নাহি শুনি
सबे मेलिऽ आनन्दे करेन हरि-ध्वनि
निरन्तर चतुर्-दिके आर नाहि शुनि
 
 
अनुवाद
वे सब हर्षपूर्वक हरि नाम का कीर्तन कर रहे थे। चारों दिशाओं में कोई अन्य ध्वनि सुनाई नहीं दे रही थी।
 
They were all joyfully chanting the name of Hari. No other sound could be heard in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)