श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 202
 
 
श्लोक  3.4.202 
অচ্যুতেরে কোলে করিঽ শ্রী-গৌরসুন্দর
প্রেম-জলে ধুইলেন তাঙ্র কলেবর
अच्युतेरे कोले करिऽ श्री-गौरसुन्दर
प्रेम-जले धुइलेन ताङ्र कलेवर
 
 
अनुवाद
श्री गौरसुन्दर ने अच्युत को गले लगाया और उनके शरीर को प्रेमाश्रुओं से भिगो दिया।
 
Sri Gaurasundara embraced Achyuta and drenched his body with tears of love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)