श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 195
 
 
श्लोक  3.4.195 
চতুর্-দিকে ভক্ত-গণ করেন ক্রন্দন
কি অদ্ভুত প্রেম, স্নেহ,—না যায বর্ণন
चतुर्-दिके भक्त-गण करेन क्रन्दन
कि अद्भुत प्रेम, स्नेह,—ना याय वर्णन
 
 
अनुवाद
चारों ओर के भक्तजन रोने लगे। ऐसा अद्भुत प्रेम और स्नेह वर्णन से परे है।
 
Devotees all around began to cry. Such amazing love and affection is beyond description.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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