श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 152
 
 
श्लोक  3.4.152 
এই মাত্র অদ্বৈত বলিতে সেই-ক্ষণে
ধাইযা অচ্যুতানন্দ আইলা সেই স্থানে
एइ मात्र अद्वैत बलिते सेइ-क्षणे
धाइया अच्युतानन्द आइला सेइ स्थाने
 
 
अनुवाद
जब अद्वैत अभी बोल ही रहे थे, अच्युतानन्द दौड़ते हुए उस स्थान पर आये।
 
While Advaita was still speaking, Achyutananda came running to the place.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)