श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  3.4.151 
দেখিতেছ—গুরু তান কেশব ভারতী
আর কেনে তবে জিজ্ঞাসহ আমাঽ-প্রতি?”
देखितेछ—गुरु तान केशव भारती
आर केने तबे जिज्ञासह आमाऽ-प्रति?”
 
 
अनुवाद
“आप पहले से ही जानते हैं कि केशव भारती उनके गुरु हैं, फिर आप मुझसे क्यों पूछ रहे हैं?”
 
“You already know that Keshav Bharati is his guru, then why are you asking me?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)