श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 145
 
 
श्लोक  3.4.145 
সন্ন্যাসী বলেন,—“এই কেশব ভারতী
চৈতন্যের কে হযেন, কহ মোর প্রতি”
सन्न्यासी बलेन,—“एइ केशव भारती
चैतन्येर के हयेन, कह मोर प्रति”
 
 
अनुवाद
संन्यासी ने पूछा, "मुझे बताइए, केशव भारती का चैतन्य से क्या संबंध है?"
 
The sannyasi asked, "Tell me, what is the relation of Keshav Bharati with Chaitanya?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)