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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन
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श्लोक 132
श्लोक
3.4.132
ভক্ত-সব-স্থানে কহিলেন এই কথা
“আমি চলিবাঙ নীলাচল-চন্দ্র যথা”
भक्त-सब-स्थाने कहिलेन एइ कथा
“आमि चलिबाङ नीलाचल-चन्द्र यथा”
अनुवाद
उन्होंने सभी भक्तों से कहा, “मैं नीलचल-चन्द्र के दर्शन करने जाऊँगा।”
He told all the devotees, “I will go to see Neelachala-Chandra.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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