श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  3.4.105 
আছুক তাহান ভয, তাহানে দেখিতে
যতেক আইসে লোক চতুর্-দিক হৈতে
आछुक ताहान भय, ताहाने देखिते
यतेक आइसे लोक चतुर्-दिक हैते
 
 
अनुवाद
भगवान् की तो बात ही क्या, उन्हें देखने के लिए चारों दिशाओं से आने वाले लोग भी निर्भय हो गए।
 
Forget about God, even the people coming from all directions to see him became fearless.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)