श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.4.10 
হুঙ্কার, গর্জন, কম্প, পুলক, ক্রন্দন
নিরন্তর আছাড পডযে ঘনে ঘন
हुङ्कार, गर्जन, कम्प, पुलक, क्रन्दन
निरन्तर आछाड पडये घने घन
 
 
अनुवाद
वह दहाड़ा, चिल्लाया, काँपा और आँसू बहाए। उसके शरीर के रोंगटे खड़े हो गए और वह बार-बार ज़ोर से ज़मीन पर गिर पड़ा।
 
He roared, screamed, shook, and shed tears. His hair stood on end, and he fell heavily to the ground again and again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)