श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  3.2.91 
সম্ভ্রমে করিযা দণ্ডবত কর-যোড
বলে,—“প্রভু, দাস-অনুদাস মুঞি তোর”
सम्भ्रमे करिया दण्डवत कर-योड
बले,—“प्रभु, दास-अनुदास मुञि तोर”
 
 
अनुवाद
भय और श्रद्धा से हाथ जोड़कर रामचन्द्र ने उत्तर दिया, “हे प्रभु, मैं आपके सेवक का सेवक हूँ।”
 
With folded hands in fear and reverence, Ramachandra replied, “O Lord, I am the servant of your servant.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)