श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  3.2.88 
“কোন মতে এ আর্তির নহে সম্বরণ”
কান্দে, আর এই মত চিন্তে মনে মন
“कोन मते ए आर्तिर नहे सम्वरण”
कान्दे, आर एइ मत चिन्ते मने मन
 
 
अनुवाद
वह यह सोचकर रोने लगा, “ऐसे दुःख को रोकने का कोई उपाय नहीं है।”
 
He started crying thinking, “There is no way to stop such sorrow.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)