श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  3.2.87 
দেখিযা প্রভুর আর্তি রামচন্দ্র খাঙ্ন
অন্তরে বিদীর্ণ হৈল সজ্জনের-প্রাণ
देखिया प्रभुर आर्ति रामचन्द्र खाङ्न
अन्तरे विदीर्ण हैल सज्जनेर-प्राण
 
 
अनुवाद
जब रामचन्द्र खाँ ने देखा कि भगवान् इतने दुःख में हैं, तो उनका कोमल हृदय टूट गया।
 
When Ramchandra Khan saw that the Lord was in such sorrow, his tender heart broke.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)