vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,
»
श्लोक 489
श्लोक
3.2.489
ভাগ্যে আমি আজি না ধরিলুঙ্ জগন্নাথ
তবে তঽ সঙ্কট আজি হৈত আমাঽত”
भाग्ये आमि आजि ना धरिलुङ् जगन्नाथ
तबे तऽ सङ्कट आजि हैत आमाऽत”
अनुवाद
"यह तो गनीमत रही कि आज मैंने जगन्नाथ को नहीं पकड़ा। अगर मैं ऐसा करता, तो मुसीबत में पड़ जाता।"
"It's a good thing I didn't catch Jagannath today. If I had, I would have been in trouble."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×