श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 465
 
 
श्लोक  3.2.465 
এতেকে তোমরা সব-অচিন্ত্য-কথন
সম্বরিযা দেখিবা, করিলুঙ্ নিবেদন”
एतेके तोमरा सब-अचिन्त्य-कथन
सम्वरिया देखिबा, करिलुङ् निवेदन”
 
 
अनुवाद
"ये विषय मेरी समझ से परे हैं। इसलिए मेरा अनुरोध है कि आप सभी दर्शन करते समय संयम रखें।"
 
"These topics are beyond my understanding. Therefore, I request all of you to exercise restraint while visiting the temple."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)