श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 462
 
 
श्लोक  3.2.462 
কি-রূপ তোমরা, কিছু না পারি বুঝিতে
স্থির হৈঽ দেখ, তবে যাই দেখাইতে
कि-रूप तोमरा, किछु ना पारि बुझिते
स्थिर हैऽ देख, तबे याइ देखाइते
 
 
अनुवाद
"मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि तुम किस तरह के इंसान हो। अगर तुम जगन्नाथ के दर्शन करते हुए शांत रहोगे, तो मैं तुम्हें ले चलूँगा।"
 
"I don't understand what kind of person you are. If you remain quiet while visiting Jagannath, I will take you."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)