श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 454
 
 
श्लोक  3.2.454 
প্রভুরে আসিযা যে মিলিলা ভক্ত-গণ
দেখিঽ হৈলা সার্বভৌম হরষিত মন
प्रभुरे आसिया ये मिलिला भक्त-गण
देखिऽ हैला सार्वभौम हरषित मन
 
 
अनुवाद
भगवान के दर्शन के लिए आये सभी भक्तों को देखकर सार्वभौम प्रसन्न हुए।
 
Sarvabhauma was pleased to see all the devotees who had come to see the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)