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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,
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श्लोक 445
श्लोक
3.2.445
সার্বভৌম বলে,—“ভাই পডিহারি-গণ!
সবে তুলিঽ লহ এই পুরুষ-রতন”
सार्वभौम बले,—“भाइ पडिहारि-गण!
सबे तुलिऽ लह एइ पुरुष-रतन”
अनुवाद
सार्वभौम ने कहा, “हे भाई रक्षकों, कृपया इस रत्न-सदृश व्यक्तित्व को उठाओ।”
The Sovereign said, “O brother protectors, please lift this jewel-like personality.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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