श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 429
 
 
श्लोक  3.2.429 
লম্ফ দেন বিশ্বম্ভর আনন্দে বিহ্বল
চতুর্-দিকে ছুটে সব নযনের জল
लम्फ देन विश्वम्भर आनन्दे विह्वल
चतुर्-दिके छुटे सब नयनेर जल
 
 
अनुवाद
प्रेम से अभिभूत होकर विश्वम्भर हवा में उछल पड़े और उनकी आँखों से आँसू चारों दिशाओं में बहने लगे।
 
Overwhelmed with love, Vishvambhar jumped into the air and tears started flowing from his eyes in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)