श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 412
 
 
श्लोक  3.2.412 
সে দিনের যে আছাড, যে আর্তি-ক্রন্দন
অনন্তের জিহ্বায সে না যায বর্ণন
से दिनेर ये आछाड, ये आर्ति-क्रन्दन
अनन्तेर जिह्वाय से ना याय वर्णन
 
 
अनुवाद
यहां तक ​​कि अनंत भी यह वर्णन नहीं कर सकते कि उस दिन वे किस प्रकार बलपूर्वक भूमि पर गिर पड़े और किस प्रकार दयनीय रूप से रोये।
 
Even Ananta cannot describe how he fell forcefully on the ground and cried pitifully that day.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)