श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 383
 
 
श्लोक  3.2.383 
তোমার নিকটে থাকি সবে মোর মন
দুষ্ট-সঙ্গ-দোষে ভাল নাহিক কখন
तोमार निकटे थाकि सबे मोर मन
दुष्ट-सङ्ग-दोषे भाल नाहिक कखन
 
 
अनुवाद
"मुझे आपके निकट रहने की इच्छा है। बुरी संगति में रहना कभी अच्छा नहीं होता।
 
"I want to be near you. It's never good to be in bad company."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)