श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 377
 
 
श्लोक  3.2.377 
সে স্থানে নাহিক যম-দণ্ড-অধিকার
আমি করি ভাল-মন্দ-বিচার সবার
से स्थाने नाहिक यम-दण्ड-अधिकार
आमि करि भाल-मन्द-विचार सबार
 
 
अनुवाद
"यमराज को उस स्थान के किसी भी व्यक्ति को दंड देने का अधिकार नहीं है। मैं ही वहाँ के सभी लोगों के पुण्य और पाप का न्याय करता हूँ।"
 
"Yamaraja has no right to punish anyone in that place. I alone judge the merits and demerits of all the people there."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)