श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 374
 
 
श्लोक  3.2.374 
প্রদক্ষিণ-ফল পায করিলে ভ্রমণ
কথা মাত্র যথা হয আমার স্তবন
प्रदक्षिण-फल पाय करिले भ्रमण
कथा मात्र यथा हय आमार स्तवन
 
 
अनुवाद
"उस स्थान पर विचरण करने से परिक्रमा का फल प्राप्त होता है। उस स्थान पर बोला गया प्रत्येक शब्द मेरे लिए की गई प्रार्थना है।"
 
"Just walking around that place gives the result of circumambulation. Every word spoken at that place is a prayer to me."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)