श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 357
 
 
श्लोक  3.2.357 
তোর পাদ-পদ্ম মোর একান্ত জীবন
অরণ্যে থাকিব চিন্তিঽ তোমার চরণ
तोर पाद-पद्म मोर एकान्त जीवन
अरण्ये थाकिब चिन्तिऽ तोमार चरण
 
 
अनुवाद
"आपके चरणकमल ही मेरे प्राण और आत्मा हैं। मैं वन में रहकर आपके चरणकमलों का स्मरण करूँगा।"
 
"Your feet are my life and soul. I will remember your feet while living in the forest."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)