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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,
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श्लोक 351
श्लोक
3.2.351
তবে শেষে ধরিযা প্রভুর শ্রী-চরণ
করিতে লাগিল শিব আত্ম-নিবেদন
तबे शेषे धरिया प्रभुर श्री-चरण
करिते लागिल शिव आत्म-निवेदन
अनुवाद
तब शिवजी ने भगवान के चरणकमल पकड़ लिये और पूर्ण समर्पण के साथ बोलने लगे।
Then Lord Shiva held the Lord's lotus feet and started speaking with complete surrender.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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