श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 349
 
 
श्लोक  3.2.349 
হেন তঽ না দেখি আমি সṁসার-ভিতর
তোমাঽ-বৈ যে আমারে করে অনাদর”
हेन तऽ ना देखि आमि सꣳसार-भितर
तोमाऽ-बै ये आमारे करे अनादर”
 
 
अनुवाद
“ऐसा प्रतीत होता है कि संसार में तुमसे अधिक मेरा अनादर करने वाला कोई नहीं है।”
 
“It seems there is no one in the world who disrespects me more than you.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)