श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 345
 
 
श्लोक  3.2.345 
কোন্ কীট কাশীরাজ অধম নৃপতি
তার লাগিঽ যুদ্ধ কর আমার সṁহতি
कोन् कीट काशीराज अधम नृपति
तार लागिऽ युद्ध कर आमार सꣳहति
 
 
अनुवाद
"यह तुच्छ, पतित राजा काशीराज कौन है? तूने उसके लिए मुझसे युद्ध किया?"
 
"Who is this insignificant, fallen King Kashiraj? You fought me for him?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)