श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.2.31 
দৈবে সে-ই প্রভু, ভক্ত-গণো সে-ই সব
উপমাও সে-ই সে, সে-ই সে অনুভব
दैवे से-इ प्रभु, भक्त-गणो से-इ सब
उपमाओ से-इ से, से-इ से अनुभव
 
 
अनुवाद
भाग्यवश, वे वही भगवान थे, वे वही भक्त थे, परिस्थिति भी वही थी, तथा उनकी भावनाएँ भी वही थीं।
 
Fortunately, it was the same God, it was the same devotee, the situation was the same, and their feelings were the same.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)