श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 295
 
 
श्लोक  3.2.295 
আমরা ও সবে ভিক্ষা করিঽ এই ঠাঙি
আজি থাকি, কালি প্রভু পাইব এথাই”
आमरा ओ सबे भिक्षा करिऽ एइ ठाङि
आजि थाकि, कालि प्रभु पाइब एथाइ”
 
 
अनुवाद
"हम सबको भिक्षा माँगनी चाहिए और आज यहीं रहना चाहिए। कल हम यहीं प्रभु से मिलेंगे।"
 
"We should all beg for alms and stay here today. Tomorrow we will meet the Lord here."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)